By | March 7, 2019
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‘’ औरत’’ ईश्वर की एक विचित्र रचना है ..

जो घर संभालती है , अपना परिवार संभालती है ,

अपने पति को संभालती है , अपने भाइयो को संभालती है ,,

और सबसे अहम की एक समाज को संभालती है…

इसलिए औरतो का आदर करे निरादर नहीं ….

हमारे समाज की औरते अब सुरक्षित है ,

मगर सिर्फ नेताओ के जुबान पर और

किसी किताब के पन्नों पर ….

असल जिंदगी में तो उन्हें एक एक कदम

सोच विचार कर चलना है …

सच कहू तो हमारा समाज सुरक्षित नहीं है ,

न तो गायों के लिए ओरो न ही औरतो के लिए ,,

जबकि इन दोनों को हमारा समाज माता कहता है …

हमारे समाज की आभूषण है ‘’हर एक औरत’’

जो अपने कुशलता , सुंदरता और व्यवहारता  से

समाज को सजाती व् सवारती है ….

मगर अफ़सोस , इस ज़माने की वजह से

वह वही बन गई ….

आजकल के इस दौर में स्त्री जाति

कही सुरक्षित नहीं है ..

न छोटी बच्ची , न लड़की , न महिला

और न हि बूढी औरत …..

कोई न कोई इन् पर अपनी

गन्दी नज़रे जमाए खड़ा है …

औरतो का आदर

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