By | March 28, 2019
Spread the love

तेरी एल झलक खातिर

आज फिर तेरी गलियों के चक्कर लगा आये हम , आज फिर तेरी एक झलक खातिर पूरा दिन तेरी गलियों में बिता आये हम…..

 तेरी एल झलक खातिर

उसे मालूम चलेगा तब वह

जब उसे मालूम चलेगा तब वह बहुत पछताएगि , कि मोती ठुकरा दिए पत्थर चुनते चुनते ।।

उसे मालूम चलेगा तब वह

बहुत अच्छे लगते हो

तुम दूर रहते हो तब भी बहुत अच्छे लगते हो , अगर पास रहते तो पता न क्या होता।।।

बहुत अच्छे लगते हो

सबको भुला सकते है मगर

बादल चाँद को छुपा_सकता है , आकाश को नही …. हम सबको भुला सकते है मगर तुम्हें नहीं।।।

सबको भुला सकते है मगर

ना उसने मुड़ कर देखा

ना उसने मुड़ कर देखा, ना हमने पलट कर आवाज़ दी ! एक अजीब सा वक़्त था जिसने हम दोनोँ को पत्थर बना दिया !!

ना उसने मुड़ कर देखा,

मोहब्बत बढती जा रही

तुझ से दूर रहकर…. मोहब्बत बढती जा रही है क्या कहूँ… केसे कहूँ… ये दुरी तुझे और करीब ला रही।

मोहब्बत बढती जा रही

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *